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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(5):118-120

प्रदीप सौरभ कृत तीसरी ताली उपन्यास में किन्नर विमर्श

Author Name: डॉ. शेख मोहसीन शेख रशीद;  

1. सहयोगी अध्यायक, हिंदी विभाग, कला महाविद्यालय, बिडकीन, तह. पैठण, जि. छ. संभाजीनगर, महाराष्ट्र, भारत

Paper Type: research paper
Article Information
Paper Received on: 2026-07-15
Paper Accepted on: 2026-08-29
Paper Published on: 2026-09-08
Abstract:

हिंदी साहित्य में किन्नर विमर्श समकालीन साहित्य की एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील धारा के रूप में उभरकर सामने आया है। प्रदीप सौरभ का उपन्यास तीसरी ताली किन्नर समुदाय के जीवन, संघर्ष, सामाजिक उपेक्षा, लैंगिक पहचान, आर्थिक विषमता, शारीरिक एवं मानसिक शोषण तथा सामाजिक अस्मिता को केंद्र में रखकर लिखा गया एक महत्वपूर्ण उपन्यास है। प्रस्तुत शोध में तीसरी ताली के माध्यम से किन्नर जीवन के विविध पक्षों का विश्लेषण किया गया है। उपन्यास में किन्नर समुदाय को केवल उपेक्षित अथवा हास्य का पात्र न मानकर उनकी मानवीय संवेदनाओं, इच्छाओं, संबंधों और अस्तित्व-संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। विनीत, मंजू, डिम्पल, विनीता, निकिता, चितकबरी तथा अन्य पात्रों के माध्यम से लेखक ने लैंगिक पहचान और सामाजिक स्वीकृति की जटिलताओं को उजागर किया है। उपन्यास में परिवार और समाज द्वारा किन्नरों के प्रति अपनाए जाने वाले भेदभाव, रोजगार की समस्या, गरीबी, शोषण, हिंसा, प्रेम, वैवाहिक संबंध, ‘गिरिया’ की परंपरा तथा आत्मसम्मान की आकांक्षा जैसे विभिन्न मुद्दों को रेखांकित किया गया है। साथ ही, उपन्यास यह भी स्पष्ट करता है कि किन्नर समुदाय के भीतर विविध सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्थितियाँ विद्यमान हैं और उन्हें एकरूपता से देखना उचित नहीं है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि तीसरी ताली किन्नर समुदाय की उपेक्षित आवाज को साहित्यिक अभिव्यक्ति प्रदान करते हुए समाज की रूढ़िवादी लैंगिक धारणाओं पर प्रश्न उठाता है। इस प्रकार यह उपन्यास किन्नर विमर्श को मानवीय संवेदना, सामाजिक न्याय, पहचान और समानता के व्यापक संदर्भ से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कृति के रूप में सामने आता है।

Keywords:

किन्नर विमर्श, तीसरी ताली, प्रदीप सौरभ, लैंगिक पहचान, सामाजिक उपेक्षा, किन्नर जीवन, अस्मिता, शोषण, सामाजिक संघर्ष, मानवीय संवेदना, समानता, सामाजिक न्याय।

How to Cite this Article:

डॉ. शेख मोहसीन शेख रशीद. प्रदीप सौरभ कृत तीसरी ताली उपन्यास में किन्नर विमर्श. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2026: 5(5):118-120


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