International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(4):619-625
कौटिल्य का अर्थशास्त्र और मौर्यकालीन शासन व्यवस्था-एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author Name: राहुल कुमार;
Paper Type: research paper
Article Information
Abstract:
प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन के इतिहास में आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) विरचित 'अर्थशास्त्र' एक युगप्रवर्तक एवं कालजयी ग्रन्थ है। ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में रचित यह ग्रन्थ केवल अर्थशास्त्र तक सीमित न होकर राज्यशास्त्र, कूटनीति, लोक प्रशासन, सैन्य रणनीति एवं विधि-व्यवस्था का एक विशद और व्यावहारिक कोष है। प्रस्तुत शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य कौटिल्य के अर्थशास्त्र में प्रतिपादित शासन सिद्धांतों तथा चंद्रगुप्त मौर्य एवं सम्राट अशोक के शासनकाल में क्रियान्वित मौर्यकालीन प्रशासनिक संरचना का एक गहन विश्लेषणात्मक मूल्यांकन करना है।
अध्ययन में कौटिल्य के 'सप्तांग सिद्धांत' (राज्य के सात अंग) को केंद्रीय आधार मानकर केंद्रीय, प्रांतीय, स्थानीय, सैन्य, गुप्तचर, वित्तीय एवं न्यायिक प्रशासन की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक प्रणाली का सूक्ष्म परीक्षण किया गया है। शोध के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि मौर्यकालीन शासन व्यवस्था एक अत्यधिक विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन वाली केंद्रीयकृत लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा पर आधारित थी। कौटिल्य का 'योगक्षेम' सिद्धांत राजा के एकाधिकार पर प्रजा के कल्याण को प्राथमिकता प्रदान करता है। प्रस्तुत पत्र प्राचीन भारतीय प्रशासनिक मॉडल की आधुनिक लोक प्रशासन और सुशासन के संदर्भ में प्रासंगिकता का भी विश्लेषणात्मक रेखांकन करता है।
Keywords:
अर्थशास्त्र, कौटिल्य, मौर्य साम्राज्य, सप्तांग सिद्धांत, तीर्थ एवं अध्यक्ष, धर्मस्थीय एवं कण्टकशोधन, योगक्षेम, सुशासन।
How to Cite this Article:
राहुल कुमार. कौटिल्य का अर्थशास्त्र और मौर्यकालीन शासन व्यवस्था-एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2026: 5(4):619-625
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