International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(4):299-302
भारत की विदेश नीति में गुटनिरपेक्षता की बदलती भूमिका
Author Name: अनिल कुमार; डॉ. महेंद्र सिंह;
Paper Type: research paper
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Abstract:
गुटनिरपेक्षता भारत की स्वतंत्रता के बाद स्थापित की गई एक महत्वपूर्ण विदेश नीति थी, जिसका उद्देश्य देश को वैश्विक शीत युद्ध के दो प्रमुख गुटों से दूर रखना था। यह नीति भारत के लिए राष्ट्रीय संप्रभुता, स्वतंत्र निर्णय क्षमता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की गारंटी थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में गुटनिरपेक्षता ने भारत को वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र और सम्मानित राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। हालांकि, वैश्विक राजनीति में समय के साथ आए बदलावों और विशेषकर शीत युद्ध के बाद के एकध्रुवीय विश्व में इस नीति की भूमिका में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। आर्थिक उदारीकरण, वैश्वीकरण और बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों ने भारत को गुटनिरपेक्षता की परंपरागत अवधारणा से हटकर अधिक व्यावहारिक और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान में भारत बहुध्रुवीय विश्व में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जहां वह सामरिक गठबंधनों और आर्थिक साझेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखता है। नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में गुटनिरपेक्षता की नीति ने नई दिशा पाई है, जिसमें स्वतंत्र निर्णय की क्षमता बनाए रखते हुए वैश्विक गठबंधनों में सक्रिय भागीदारी शामिल है। इस शोधपत्र में भारत की गुटनिरपेक्षता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, शीत युद्ध के दौरान इसकी भूमिका, शीत युद्ध के बाद के बदलाव, और 21वीं सदी में इसकी प्रासंगिकता पर गहन विश्लेषण किया गया है।
Keywords:
गुटनिरपेक्षता,भारत की विदेश नीति,शीत युद्ध,बहुध्रुवीय विश्व,वैश्वीकरण
How to Cite this Article:
अनिल कुमार,डॉ. महेंद्र सिंह. भारत की विदेश नीति में गुटनिरपेक्षता की बदलती भूमिका. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2026: 5(4):299-302
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