International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2025;4(1):308-315
महिला भिखारियों का स्वास्थ्य: समाजशास्त्रीय विश्लेषण
Author Name: शिवांगी; आरती कुमारी;
Paper Type: research paper
Article Information
Abstract:
महिला भिखारियों का स्वास्थ्य केवल जैविक या चिकित्सकीय विषय नहीं, बल्कि एक जटिल सामाजिक एवं संरचनात्मक वास्तविकता है, जो आर्थिक वंचना, लैंगिक असमानता, सामाजिक बहिष्करण, संस्थागत उपेक्षा तथा सीमित संसाधनों से गहराई से प्रभावित होता है। प्रस्तुत शोध-पत्र में महिला भिखारियों की स्वास्थ्य-स्थिति का समाजशास्त्रीय विश्लेषण संरचनात्मक प्रकार्यवाद, वेबर के सामाजिक स्तरीकरण सिद्धांत, प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद, गोफमैन के कलंक सिद्धांत तथा स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारकों के दृष्टिकोण के आधार पर किया गया है। इन सिद्धांतों के समेकित विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि महिला भिखारियों की स्वास्थ्य समस्याएँ बहुआयामी सामाजिक कारकों की परस्पर क्रिया का परिणाम हैं। अध्ययन यह प्रतिपादित करता है कि स्वास्थ्य असमानताओं को दूर करने के लिए केवल चिकित्सकीय हस्तक्षेप पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, पोषण, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, सामाजिक पुनर्वास, सम्मानजनक आजीविका तथा अधिकार-आधारित एवं समावेशी नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। यह शोध महिला भिखारियों के स्वास्थ्य को व्यापक समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य में समझने तथा समावेशी नीति-निर्माण के लिए उपयोगी सैद्धांतिक आधार प्रदान करता है।
Keywords:
महिला भिखारी, स्वास्थ्य, सामाजिक निर्धारक, सामाजिक स्तरीकरण, कलंक, सामाजिक बहिष्करण, समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण।
How to Cite this Article:
शिवांगी,आरती कुमारी. महिला भिखारियों का स्वास्थ्य: समाजशास्त्रीय विश्लेषण. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2025: 4(1):308-315
Download PDF