International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(3):759-760
प्राचीन भारत में माप-तौल प्रणाली का संस्थागतकरण: मौर्यकालीन केंद्रीकरण से गुप्त-हर्ष कालीन सामंती विकेंद्रीकरण तक एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author Name: प्रियंका; डॉ. नीलम रानी;
Paper Type: research paper
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Abstract:
प्राचीन भारतीय आर्थिक इतिहास में माप-तौल प्रणाली (Metrology) केवल वाणिज्यिक विनिमय का उपकरण नहीं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक गहराई और राजनैतिक दर्शन का प्रतिबिंब रही है। प्रस्तुत शोध पत्र मौर्यकाल से लेकर हर्षवर्धन काल (लगभग चौथी शताब्दी ई.पू. से आठवीं शताब्दी ई.स्वी. तक) के मध्य मापन प्रणाली के संस्थागतकरण (Institutionalization) और उसमें आए संरचनात्मक परिवर्तनों का एक तुलनात्मक व विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। मौर्य साम्राज्य ने जहाँ 'पौतवाध्यक्ष' जैसी संस्था के माध्यम से माप-तौल पर एक अभूतपूर्व राजकीय एवं केंद्रीकृत नियंत्रण स्थापित किया, वहीं गुप्त और उत्तर-गुप्त काल तक आते-आते सामंतवाद (Feudalism) के उदय और भूमि अनुदानों की प्रचुरता ने इस व्यवस्था को 'क्षेत्रीयकरण' और विकेंद्रीकरण की ओर धकेला। यह शोध पत्र साहित्यिक (अर्थशास्त्र, अमरकोश, स्मृतियाँ) और पुरातात्विक (ताम्रपत्र, बाट, मुद्राएँ) साक्ष्यों के आधार पर यह प्रतिपादित करता है कि राजनैतिक सत्ता के स्वरूप में आए परिवर्तनों ने सीधे तौर पर मापन के मानकों और राजस्व संग्रह की पद्धतियों को प्रभावित किया।
Keywords:
पौतवाध्यक्ष, कुल्यावाप, सामंतवाद, विकेंद्रीकरण, मौद्रिकरण, प्राचीन भारतीय अर्थव्यवस्था।
How to Cite this Article:
प्रियंका,डॉ. नीलम रानी. प्राचीन भारत में माप-तौल प्रणाली का संस्थागतकरण: मौर्यकालीन केंद्रीकरण से गुप्त-हर्ष कालीन सामंती विकेंद्रीकरण तक एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2026: 5(3):759-760
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