International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(3):95-103
भारतीय समाज में विविधता एवं सामाजिक एकता: जाति, धर्म और सामूहिक पहचान का समाजशास्त्रीय विश्लेषण
Author Name: डॉ. शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय;
Paper Type: research paper
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Abstract:
भारतीय समाज अपनी बहुलतावादी संरचना के कारण विश्व के सबसे विशिष्ट समाजों में से एक है। यहाँ जाति, धर्म, भाषा, संस्कृति तथा जीवन-शैली के विविध स्वरूप एक साथ विद्यमान हैं। यह विविधता भारतीय समाज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्त्वपूर्ण अंग है। यद्यपि भारतीय समाज में अनेक प्रकार की सामाजिक विषमताएँ और विभाजन पाए जाते हैं, फिर भी सामाजिक एकता और सामूहिक पहचान की भावना निरंतर बनी रहती है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य भारतीय समाज में विद्यमान सामाजिक एवं धार्मिक विविधताओं का समाजशास्त्रीय विश्लेषण करते हुए यह समझना है कि जाति और धर्म जैसे कारक सामूहिक पहचान के निर्माण में किस प्रकार भूमिका निभाते हैं। यह अध्ययन द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है, जिसमें जनगणना आँकड़ों, सरकारी प्रतिवेदनों, शोध ग्रंथों, पुस्तकों तथा शोध-पत्रों आदि का उपयोग किया गया है। प्रस्तुत अध्ययन में यह पाया गया कि भारतीय समाज में विविधताओं के बावजूद संविधान, लोकतांत्रिक मूल्य, साझा सांस्कृतिक परंपराएँ तथा राष्ट्रीय चेतना सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जातीय एवं धार्मिक भिन्नताएँ कभी-कभी सामाजिक तनाव उत्पन्न करती हैं, किन्तु भारतीय समाज की अनुकूलनशीलता और सहअस्तित्व की परंपरा उन्हें संतुलित करती है। निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि “अनेकता में एकता” केवल एक सांस्कृतिक आदर्श नहीं, बल्कि भारतीय समाज की जीवंत सामाजिक वास्तविकता है।
Keywords:
भारतीय समाज, सामाजिक विविधता, जातिगत विविधता, धार्मिक विविधता, सामूहिक पहचान, सामाजिक एकता, अनेकता में एकता
How to Cite this Article:
डॉ. शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय. भारतीय समाज में विविधता एवं सामाजिक एकता: जाति, धर्म और सामूहिक पहचान का समाजशास्त्रीय विश्लेषण. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2026: 5(3):95-103
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