International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(2):822-828
ब्रिटिशकाल में भारतीय पत्रकारिता का विकास और स्वतंत्रता आंदोलन पर उसका निर्णायक प्रभाव
Author Name: डॉ. राकेश मोहन नौटियाल; डॉ. पंकज पाण्डेय; डॉ. अमित चमोली;
Paper Type: research paper
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Abstract:
ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में भारतीय पत्रकारिता ने स्वतंत्रता आंदोलन में एक "दोहरी तलवार" और "राष्ट्रीय उत्प्रेरक" की भूमिका निभाई, जो केवल सूचना प्रसार का माध्यम नहीं, बल्कि क्रान्ति का उपकरण भी बनी । 1780 में जेम्स ऑगस्टस हिक्की के 'हिकिज बंगाल गजट' के साथ प्रेस का श्रीगणेश हुआ, जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी की कटु आलोचना करके प्रेस की स्वतंत्रता के लिए पहली गंभीर लड़ाई को चिह्नित किया । राजा राम मोहन राय ने 'संवाद कौमुदी' और 'मिरात-उल-अखबार' जैसे पत्रों के माध्यम से सामाजिक-धार्मिक सुधारों (सती प्रथा, मूर्ति पूजा आदि के खिलाफ) का व्यापक अभियान चलाया ।19वीं सदी के मध्य में भाषाई पत्रकारिता का तेजी से विकास हुआ, जिसने मीडिया की लगाम आम जनता तक पहुंचाई और राष्ट्रीय चेतना को क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक बनाया । दादाभाई नौरोजी ने 'ड्रेन थ्योरी' को लोकप्रिय बनाने के लिए पत्रकारिता का उपयोग किया, जिससे ब्रिटिश शासन की आर्थिक आलोचना शुरू हुई । बाल गंगाधर तिलक ने 'केसरी' और 'द मराठा' के माध्यम से स्वराज की भूख पैदा की और साधारण लोगों की दशा को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिससे उन्हें 'लोकमान्य' की उपाधि मिली । राष्ट्रवादी प्रेस के उत्कर्ष के जवाब में, ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी कानून लागू किए, जिनमें 1878 का वर्नाकुलर प्रेस एक्ट (VPA) और 1910 का भारतीय सामाचार पत्र अधिनियम शामिल थे, जिन्हें जनता के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा । महात्मा गांधी ने 'यंग इंडिया' और 'हरिजन' के माध्यम से सत्य, अहिंसा और सेवा के आदर्शों का प्रचार किया, जिससे असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों को अभूतपूर्व जनसमर्थन मिला । डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने 'मूकनायक' और 'बहिष्कृत भारत' जैसी पत्रिकाएँ शुरू करके शोषित और पीड़ित आवाज़ को शक्ति दी और 'स्वतंत्रता' का अर्थ सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित किया । इस प्रकार, ब्रिटिश काल की पत्रकारिता ने प्रतिरोध की लौ को प्रज्वलित रखा और स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक आधार प्रदान करते हुए आधुनिक भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अमूल्य विरासत छोड़ी ।
Keywords:
स्वतत्रता आन्दोलन, पत्रकारिता, राष्ट्रीयता, प्रेस, समाचार-पत्र, सामाजिक सुधार, प्रतिबंधित साहित्य
How to Cite this Article:
डॉ. राकेश मोहन नौटियाल,डॉ. पंकज पाण्डेय,डॉ. अमित चमोली. ब्रिटिशकाल में भारतीय पत्रकारिता का विकास और स्वतंत्रता आंदोलन पर उसका निर्णायक प्रभाव. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2026: 5(2):822-828
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