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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(2):763-768

1857 ई. की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका: एक नवीन दृष्टिकोण

Author Name: डॉ. जय प्रकाश सिंह;  

1. असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, इतिहास, राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बांदा, उत्तर प्रदेश, भारत

Paper Type: research paper
Article Information
Paper Received on: 2026-03-10
Paper Accepted on: 2026-04-03
Paper Published on: 2026-04-23
Abstract:

1857 की क्रांति भारतीय इतिहास का प्रथम संगठित स्वतंत्रता संग्राम माना जाता है। इस आंदोलन में अनेक नायकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिनमें झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की जगमगाती दीपशिखा शौर्य की सजीव प्रतिमा महारानी लक्ष्मीबाई केवल झाँसी की ही नही,भारत की ही नही अपितु विश्व की उन वीरांगनाओं में एक है जिनकी गिनती उंगलियों में की जा सकती है। वह लक्ष्मी नाम है, जिसने जनमानस में नारी के प्रति स्थापित कल्पना को परिवर्तित कर उसे अबला के स्थान पर सबला ,कोमलांगी के स्थान पर वज्रांगना और रमणी के स्थान पर रणचण्डी के रूप में प्रस्थापित किया। उसने सिद्ध कर दिखाया कि चूडियाँ धारण करने वाली कोमल कलाइयाँ जब तलवार धारण करती है तो उसकी झन-झन में भैरवी साकार हो उठती है। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने जिस बहादुरी और वीरता के साथ अंग्रेजो के विरुद्ध लडाइयाँ लड़ी वह भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अकिंत है। आज भी समस्त भारतवासी रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा गा-गा कर अपने अन्दर उत्साह और साहस भरतें है । सर हयूरोज ने रानी लक्ष्मीबाई की प्रशंसा में अपनी डायरी में लिखा था, कि महारानी का उच्च कुल आश्रितों और सिपाहियों के प्रति उनकी असीम उदारता एवं कठिन समय में भी अडिग धीरज उनके इन गुणों ने रानी को हमारा एक अजेय प्रतिद्धन्दी बना दिया, वह शत्रु दल की सबसे बहादुर और सर्वश्रेष्ठ सेना की नेत्री थी ।

Keywords:

वीरांगना, स्वतंत्रता संग्राम, रानी लक्ष्मीबाई, महारानी, झांसी, लार्ड डलहौजी, दामोदर राव, सरदार, मरदाना वेश, भारतवासी, कालपी, क्रांतिकारी।

How to Cite this Article:

डॉ. जय प्रकाश सिंह. 1857 ई. की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका: एक नवीन दृष्टिकोण. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2026: 5(2):763-768


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