International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2025;4(2):485-489
सामाजिक न्याय, समानता और समावेशिता के प्रति भारत का अद्वितीय दृष्टिकोण
Author Name: रविन्द्र कुमार रीतौरिया;
Paper Type: research paper
Article Information
Abstract:
भारतीय समाज और संविधान में लोकतंत्र और मानवता सर्वोपरि है, हमारे धर्म, संस्कार, संस्कृति और संविधान ने सभी व्यक्तियों के लिए कुछ न कुछ ऐसे अधिकार, कानून, प्रसंग आदि दिये हैं जिसमें सम्पूर्ण मानव जाति का कल्याण और प्रगतिशीलता का भाव झलकता है। भारतीय साहित्य में तीन बातों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है- प्रथम धर्म, द्वितीय मानवता और तृतीय राष्ट्र की रक्षा करना ही मानव जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य है। मनुष्य का एक ही कत्र्तव्य है कि वह मानवतावादी दृष्टिकोण को अपनाते हुए सभी जीवों के साथ समानता का व्यवहार करें। भारतीय समाज में सामाजिक न्याय, समानता और समावेशिता एक विमर्श के रूप में प्रचलन है जिसका प्रयाग राजनीति और समाजशास्त्रीय उपयोगिताओं में समान रूप से होता है।
Keywords:
सामाजिक न्याय, समानता, अम्बेडकरवादी विचारधारा, सामाजिक- राजनीति दृष्टिकोण, सामाजिक व्यवहार, जातिवाद, वर्गवाद, संवैधानिकता
How to Cite this Article:
रविन्द्र कुमार रीतौरिया. सामाजिक न्याय, समानता और समावेशिता के प्रति भारत का अद्वितीय दृष्टिकोण. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2025: 4(2):485-489
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