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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2025;4(4):705-707

प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति

Author Name: मिनाक्षी देवी;   डॉ. नहीद अहमद;  

1. पी.एच.डी. रिसर्च स्कॉलर, मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग, आई.ई.सी. विश्वविद्यालय, बद्दी, सोलन, हिमाचल प्रदेश, भारत

2. असिस्टेंट प्रोफेसर, मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग, आई.ई.सी. विश्वविद्यालय, बद्दी, सोलन, हिमाचल प्रदेश, भारत

Abstract

यत्रनार्यस्ते पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता

अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती है वहाँ देवता भी निवास करते हैं यह श्लोक केवलनारी जाति की प्रशंसा करने के लिए नहीं है बल्कि ये एक कठोर सत्य है जिसे महिलाओं के अपमान करने वालों को ध्यान में रखना चाहिए और जो मात्र शक्ति का आदर करते हैं उनके लिए ये शब्द अमृत समान है। प्रकृति का ये नियम पूरी सृष्टि में , हर एक समाज, एक परिवार, देश और मनुष्य जाति पर लागू होता है।

किसी भी काल, देश, समाज के निर्माण में नारी का महत्वपूर्ण योगदान होता है। भारतीय समाज में महिलाओं का दर्जा देवी स्वरूप हुआ है, अपितु वर्तमान में महिलाओं की स्थिति देखने के बाद यह प्रश्न उठता है कि प्राचीन काल में महिलाओं की स्थिति क्या रही होगी, उसी के संदर्भ में समझने की कोशिश कर रहे हैं।

Keywords

प्राचीन भारतीय समाज, महिला अधिकार, लैंगिक भूमिकाएँ, धर्मग्रंथ और नारी, सामाजिक स्थिति