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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2025;4(4):702-704

भारतीय कृषि का बदलता स्वरूप एक चिंताजनक विषय

Author Name: शमशेर सिंह;   डॉ. मोहम्मद इरफान;  

1. पी.एच.डी. रिसर्च स्कॉलर, मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग, आई.ई.सी. विश्वविद्यालय, बद्दी, सोलन, हिमाचल प्रदेश, भारत

2. असिस्टेंट प्रोफेसर, मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग, आई.ई.सी. विश्वविद्यालय, बद्दी, सोलन, हिमाचल प्रदेश, भारत

Abstract

कृषि  भारतीय  अर्थव्यवस्था  की  रीड़  की  हडडी  मानी  जाती  है  पुरातन  काल  से  केवल कृषि  ही  एकमात्र  साधन  था  जिससे  कि  मनुष्य  की  आजीविका  चलती  थी  भारतीय कृषि  वह  है । जिसमें फसल  उत्पादन  और  पशुपालन   सहित  प्राकृतिक   संसाधनों   का उपयोग  करके  विभिन्न  प्रकार  के   पौधेा  और  जीवों  की  खेती  की   जाती  है  जिससे कि  मानवीय  जरूरतों  को  पूरा  किया  जा  सके  यह  एक  प्राथमिक  कार्य  है  जो  कि भारतीय  अर्थव्यवस्था  और  58  प्रतिशत  अधिक  आबादी  की   आजीविका  के   लिए  बहुत महत्वपूर्ण  है  जिसमें  चावल  गेहूं  दालों  कपास  चाय  और  अन्य  फसलें  उगाई  जाती  है कृषि  के  साथ  साथ  पशुपालन  भी  भारतीय  कृषि  का  एक  अभिन्न  अंग  है, जिसमें

कि  पशुओं  से  संबधित  कार्य  जैसे  मतस्य  पालन  और  मुर्गी   पालन  शामिल   है।

Keywords

भारतीय कृषि विकास, जैविक खेती एवं पोषक तत्व, रासायनिक उर्वरक और पर्यावरण, कृषि चुनौतियाँ और समाधान, सतत कृषि एवं खाद्य सुरक्षा.