International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(3):1180-1184
ग्रामीण समाज की स्वच्छता में शौचालय निर्माण योजना की भूमिकाः एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
Author Name: जितेन्द्र कुमार शर्मा; डॉ. सत्येन्द्र कुमार सिंह;
Abstract
स्वच्छता मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकता है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, सामाजिक प्रतिष्ठा, पर्यावरणीय सुरक्षा तथा जीवन-स्तर से है। ग्रामीण समाज में स्वच्छता की स्थिति केवल व्यक्तिगत व्यवहार पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सामाजिक मान्यताओं, आर्थिक परिस्थितियों, शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं तथा सामुदायिक सहभागिता से भी प्रभावित होती है। भारत सरकार द्वारा 2 अक्टूबर 2014 को प्रारंभ किए गए स्वच्छ भारत मिशन का प्रमुख उद्देश्य स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार करना तथा खुले में शौच की प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिए जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करना था। मिशन के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों में व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के निर्माण को बढ़ावा दिया गया। प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समाज की स्वच्छता में शौचालय निर्माण योजना की भूमिका का समाजशास्त्रीय विश्लेषण करना है।अध्ययन वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रकृति का है तथा इसमें सरकारी रिपोर्टों, स्वच्छ भारत मिशन के आधिकारिक दस्तावेजों, जनगणना संबंधी सामग्री, शोध-पत्रों और उपलब्ध अकादमिक साहित्य को द्वितीयक स्रोतों के रूप में उपयोग किया गया है। अध्ययन में शौचालय की उपलब्धता, उपयोग, स्वच्छता संबंधी व्यवहार, महिलाओं की गरिमा एवं सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा ग्रामीण जीवन-स्तर जैसे पहलुओं पर विचार किया गया है। अध्ययन का केंद्रीय तर्क है कि शौचालय निर्माण स्वच्छता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके स्थायी परिणाम नियमित उपयोग, पर्याप्त जल, रखरखाव, सुरक्षित अपशिष्ट प्रबंधन तथा सामाजिक जागरूकता पर निर्भर करते हैं। अतः ग्रामीण स्वच्छता को एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया के रूप में समझना आवश्यक है।
Keywords
ग्रामीण समाज, स्वच्छता, शौचालय योजना, स्वच्छ भारत मिशन, सामाजिक परिवर्तन, ग्रामीण विकास।