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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(3):1170-1173

लोकगीतों में स्त्री जीवन का चित्रण: एक सांस्कृतिक एवं सामाजिक अध्ययन

Author Name: विभा सिंह;  

1. शोधार्थी, साहू रामस्वरूप महिला महाविद्यालय, बरेली महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड वि०वि०, बरेली, उत्तर प्रदेश, भारत

Abstract

भारतीय लोकगीत लोकजीवन की संवेदनाओं, परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों के सशक्त वाहक हैं। इनमें स्त्री जीवन का बहुआयामी चित्रण मिलता है। जन्म से लेकर विवाह, मातृत्व, श्रम, प्रेम, विरह, संघर्ष, सामाजिक दायित्व तथा पारिवारिक संबंधों तक स्त्री के जीवन के विभिन्न पक्ष लोकगीतों में सहज एवं मार्मिक रूप से अभिव्यक्त हुए हैं। लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समाज में स्त्री की स्थिति, उसकी भावनाओं, अधिकारों और संघर्षों का ऐतिहासिक दस्तावेज भी हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में भारतीय लोकगीतों, विशेषकर अवधी, भोजपुरी और ब्रज क्षेत्र के लोकगीतों के आधार पर स्त्री जीवन के विविध आयामों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि लोकगीतों में स्त्री केवल परिवार की सदस्य नहीं, बल्कि संस्कृति की संवाहिका, परंपराओं की संरक्षिका और सामाजिक परिवर्तन की महत्वपूर्ण वाहक के रूप में चित्रित होती है। साथ ही लोकगीतों में स्त्री के प्रति समाज की मान्यताओं, लैंगिक असमानताओं तथा उसकी आत्म-अभिव्यक्ति के स्वर भी स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आते हैं। यह शोध भारतीय लोकसाहित्य में स्त्री-विमर्श को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है।

 

 

Keywords

लोकगीत, स्त्री जीवन, लोकसंस्कृति, भारतीय समाज, नारी विमर्श, अवधी, भोजपुरी, ब्रज, लोकसाहित्य, सांस्कृतिक परंपरा।