International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(5):361-373
झारखंड की महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में परिवर्तन: 1765 से 2020 तक एक तुलनात्मक अध्ययन
Author Name: Rukhsana Praveen;
Abstract
यह अध्ययन झारखण्ड की महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक एवं राजनीतिक स्थिति में दीर्घकालीन परिवर्तन का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। औपनिवेशिक हस्तक्षेप के पूर्व महिलाएँ कृषि, पशुपालन, वनोपज संग्रह, घरेलू उत्पादन तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं। 1765 के बाद औपनिवेशिक भूमि, वन एवं राजस्व व्यवस्थाओं में परिवर्तन से उनके पारंपरिक संसाधनों तक पहुँच प्रभावित हुई। परिणामस्वरूप आर्थिक असुरक्षा, कम मजदूरी, श्रम का बढ़ता बोझ, कठिन कार्य-परिस्थितियाँ तथा विस्थापन जैसी समस्याएँ उभरीं। महिलाओं का श्रम पारिवारिक अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बना रहा। औपनिवेशिक काल में महिला शिक्षा के अवसर सीमित थे, लेकिन मिशनरी संस्थाओं तथा सामाजिक जागरूकता के प्रसार से शिक्षा की दिशा में प्रारंभिक परिवर्तन दिखाई दिया। स्वतंत्रता के बाद संविधान द्वारा समानता एवं राजनीतिक अधिकार, शिक्षा का विस्तार, पंचायती राज, रोजगार कार्यक्रम तथा महिला-केंद्रित योजनाओं ने महिलाओं की स्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया। महिला साक्षरता 2001 में 38.9 प्रतिशत से बढ़कर 2011 में 56.2 प्रतिशत हो गई। आर्थिक गतिविधियों में भी विविधता आई और महिलाएँ कृषि के साथ सेवा, व्यापार, लघु उद्योग, स्वयं सहायता समूह तथा अन्य रोजगारों से जुड़ीं। 2020–21 में महिला श्रमबल भागीदारी दर 31.7 प्रतिशत रही, जबकि पुरुषों की दर 55.0 प्रतिशत थी। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक जागरूकता और राजनीतिक सहभागिता में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, किंतु लैंगिक असमानता, असंगठित रोजगार, संपत्ति पर सीमित व्यावहारिक अधिकार और घरेलू दायित्व जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।
Keywords
झारखण्ड, महिला सशक्तीकरण, महिला शिक्षा, श्रम भागीदारी, आर्थिक आत्मनिर्भरता, लैंगिक असमानता।