International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(5):46-54
From Monopoly to Market: Privatization of Missile Production and the Evolution of India’s Strategic Autonomy एकाधिकार से बाजार तक: मिसाइल उत्पादन का निजीकरण एवं भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का विकास
Author Name: Dr. Arvind Kumar;
Abstract
बीसवीं सदी के उत्तरार्ध से ही भारत का रक्षा-औद्योगिक ढांचा राज्य-नियंत्रित एकाधिकार (State Monopoly) के अधीन संचालित होता रहा है, जहां मिसाइल प्रौद्योगिकी जैसी संवेदनशील प्रणालियों का विकास पूरी तरह से सार्वजनिक उपक्रमों तक सीमित था। हालांकि, समकालीन वैश्विक भू-राजनीति में उभरते बहु-संरेखण (Multi-alignment) के दौर और हालिया यूरेशियाई संघर्षों से उपजे 'आपूर्ति श्रृंखला' (Supply Chain) के संकट ने नई दिल्ली को अपनी पारंपरिक रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की परिभाषा को पुनर्गठित करने पर विवश किया है। यह शोध पत्र इस बात का गहन विश्लेषण करता है कि कैसे भारत सरकार द्वारा मिसाइल उत्पादन के क्षेत्र को निजी क्षेत्र (Private Defence Conglomerates) के लिए खोलना केवल एक औद्योगिक नीति मात्र न होकर, एक व्यापक भू-रणनीतिक अनिवार्यता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के एकाधिकार मॉडल से हटकर एक समावेशी बाजार-आधारित मॉडल (Market-Inclusive Model) की ओर बढ़ना भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता, आकस्मिक युद्धकालीन आपूर्ति (Wartime Surge Capacity) और तकनीकी नवाचार को अभूतपूर्व गति प्रदान कर रहा है। अंततः, यह लेख यह प्रतिपादित करता है कि 'हथियारों की संप्रभुता' स्थापित करने की यह कवायद भारत को बाहरी प्रतिबंधों एवं भू-राजनीतिक दबावों से मुक्त कर, बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था (Multipolar World Order) में एक स्वतंत्र वैश्विक ध्रुव के रूप में स्थापित करने का सबसे सुदृढ़ आधार स्तंभ है।"
Keywords
रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy), रक्षा निजीकरण (Defense Privatization),भारतीय रक्षा उद्योग (Indian Defense Industry), मिसाइल प्रौद्योगिकी (Missile Technology), सैन्य-औद्योगिक ढांचा (Military-Industrial Complex), आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta), आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन (Supply Chain Resilience).