International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(4):497-503
शिक्षण में परंपरागत विधि की प्रभावशीलता एक अध्ययन
Author Name: हीना जैन; डॉ. हरीश कुमार मेनारिया;
Abstract
यह अध्ययन "शिक्षण में परंपरागत विधि की प्रभावशीलता का अध्ययन" पर आधारित है। वर्तमान समय में शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के उद्देश्य से शिक्षा के क्षेत्र में नए विचार, नए कार्यक्रम, नई विधियो तथा नवीन साधनों का प्रयोग करना ही शैक्षिक नवाचार के अंतर्गत आता है। नई शिक्षा नीति 2020 देश के भौतिक, शैक्षिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। समग्र और लचीली शिक्षण पद्धति पर जोर देने के साथ NEP -2020 दूरी को दूर करने, पहुंच सुनिश्चित करने और सीखने के अनुभवों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी सक्षम शिक्षा के महत्व को मान्यता देती है। इस नीति में जिन प्रमुख पहलुओं पर जोर दिया गया है उनमें से एक ही मिश्रित अधिगम पद्धतियों को अपनाना। मिश्रित अधिगम जो पारंपरिक कक्षा निर्देश को ऑनलाइन तत्वों के साथ जोड़ती है तथा बहू विषयक और कौशल उन्मुख दृष्टिकोण के लिए NEP की अनुशंसाओं को संबोधित करती हैं। इस अध्ययन में प्रायोगिक अनुसंधान विधि अपनाई गई। उदयपुर जिले के एक B.A.-B.Ed. महाविद्यालय की 60 छात्राओं को दो समूहों में विभक्त किया गया। नियंत्रित समूह को परंपरागत शिक्षण विधि से तथा प्रायोगिक समूह को मिश्रित अधिगम पैकेज से शिक्षण दिया गया। दोनों समूहों पर पूर्व-परीक्षण एवं पश्च-परीक्षण किए गए।
इसके परिणामों से स्पष्ट हुआ कि पूर्व-परीक्षण में दोनों समूहों के बीच कोई सार्थक अंतर नहीं था, जिससे वे प्रारंभिक स्तर पर समान पाए गए। पश्च-परीक्षण के आधार पर परंपरागत शिक्षण विधि की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया। इस अध्ययन से यह निष्कर्ष निकला कि परंपरागत शिक्षण विधि आज भी उपयोगी है, परंतु मिश्रित शिक्षण पद्धतियों के साथ इसका समन्वित उपयोग अधिक प्रभावी हो सकता है। यह अध्ययन शिक्षक-शिक्षा संस्थानों के लिए उपयोगी तथा भविष्य के तुलनात्मक अध्ययनों के लिए आधार प्रदान करता है।
Keywords
परंपरागत विधि, शैक्षिक नवाचार, प्रौद्योगिकी सक्षम शिक्षा, समग्र एवं लचीला शिक्षण, कौशल उन्मुख दृष्टिकोण