IJ
IJCRM
International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(4):470-474

भारतीय वित्तीय संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध: चुनौतियाँ एवं सुधार एक विस्तृत शोध और विश्लेषण पत्र

Author Name: डॉ. सुरेश चन्द गुप्ता;  

1. सहायक आचार्य, राजनीति विज्ञान, राजकीय महाविधालय, करौली, राजस्थान, भारत

Abstract

वित्तीय संघवाद से तात्पर्य किसी संघीय देश में सरकार के विभिन्न स्तरों (केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों) के बीच राजस्व (Revenue) जुटाने और व्यय (Expenditure) करने की शक्तियों के विभाजन से है। भारत का वित्तीय संघवाद अद्वितीय है क्योंकि यह "विनाशकारी राज्यों के अविनाशी संघ" (An indestructible Union of destructible States) की अवधारणा पर आधारित है।

स्वतंत्रता के बाद से ही, भारत में एक मजबूत केंद्र की स्थापना की गई ताकि देश की अखंडता और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर किया जा सके। हालांकि, जैसे-जैसे राज्यों की आर्थिक आकांक्षाएं बढ़ी हैं, केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों में कई जटिलताएं और तनाव उत्पन्न हुए हैं।

Keywords

वित्तीय संघवाद ,सातवीं अनुसूची, वित्त आयोग, वस्तु एवं सेवा कर (GST), उपकर और अधिभार, सहकारी संघवाद , ऊर्ध्वाधर असंतुलन।