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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(4):187-191

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा): ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

Author Name: अनिल कुमार गोप;  

1. राजनीति विज्ञान विभाग, बिनोद बिहारी महतों कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद, झारखण्ड, भारत

Abstract

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005 में प्रारंभ की गई एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा एवं ग्रामीण विकास योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष न्यूनतम 100 दिनों का अकुशल रोजगार उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाना है। यह अधिनियम केवल रोजगार प्रदान करने का माध्यम नहीं है, बल्कि ग्रामीण गरीबी उन्मूलन, आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक समावेशन और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस अध्ययन में मनरेगा की भूमिका, उद्देश्यों, कार्यप्रणाली तथा ग्रामीण विकास पर इसके प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि मनरेगा ने ग्रामीण परिवारों को आय सुरक्षा प्रदान करने, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने, ग्रामीण आधारभूत संरचना के निर्माण तथा कृषि एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जल संरक्षण, भूमि सुधार, वृक्षारोपण और ग्रामीण संपर्क मार्गों जैसे कार्यों के माध्यम से इस योजना ने सतत ग्रामीण विकास को गति प्रदान की है।

हालांकि, मजदूरी भुगतान में देरी, भ्रष्टाचार, जागरूकता की कमी, कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी समस्याएँ जैसी चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। इन समस्याओं के समाधान हेतु पारदर्शिता, सामाजिक अंकेक्षण, तकनीकी निगरानी तथा प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है। निष्कर्ष रूप में, मनरेगा ग्रामीण भारत के आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम है, जो आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

Keywords

मनरेगा, ग्रामीण विकास, रोजगार गारंटी, गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा, सतत विकास।