International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(4):87-92
विद्यालयी माध्यम (हिन्दी एवं अंग्रेज़ी) के संदर्भ में छात्राओं की संवेगात्मक परिपक्वता: एक तुलनात्मक अध्ययन
Author Name: आयूष मिश्र; प्रो.राम सरदार यादव;
Abstract
(प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य हिन्दी एवं अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं की संवेगात्मक परिपक्वता तथा उसके विभिन्न आयामों—संवेगात्मक अस्थिरता, संवेगात्मक प्रत्यागमन, सामाजिक कुसमायोजन, व्यक्तित्व विघटन एवं स्वतंत्रता के अभाव—का तुलनात्मक अध्ययन करना था। अध्ययन में वर्णनात्मक सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया। प्रतिदर्श के रूप में लखनऊ जनपद के माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 11 में अध्ययनरत 14–16 वर्ष आयुवर्ग की 100 छात्राओं का चयन किया गया, जिनमें हिन्दी एवं अंग्रेज़ी माध्यम की 50–50 छात्राएँ सम्मिलित थीं। अध्ययन में डॉ. यशवीर सिंह एवं डॉ. महेश भार्गव द्वारा विकसित संवेगात्मक परिपक्वता मापनी (Emotional Maturity Scale) का प्रयोग किया गया। प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण मध्यमान, मानक विचलन तथा स्वतंत्र प्रतिदर्श t-परीक्षण द्वारा किया गया।
अध्ययन के परिणामों से ज्ञात हुआ कि हिन्दी एवं अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालयों की छात्राओं की समग्र संवेगात्मक परिपक्वता में सांख्यिकीय रूप से सार्थक अंतर पाया गया (t = 3.82, p < .01)। मापनी के मानकों के अनुसार अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालयों की छात्राएँ हिन्दी माध्यम विद्यालयों की अपेक्षा अधिक संवेगात्मक रूप से परिपक्व पाई गईं। संवेगात्मक परिपक्वता के सभी आयामों—संवेगात्मक अस्थिरता, संवेगात्मक प्रत्यागमन, सामाजिक कुसमायोजन, व्यक्तित्व विघटन तथा स्वतंत्रता के अभाव—में भी दोनों समूहों के मध्य सांख्यिकीय रूप से सार्थक अंतर प्राप्त हुआ। निष्कर्षतः यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालयी माध्यम के साथ-साथ विद्यालयी वातावरण, शिक्षण-पद्धति, उपलब्ध संसाधन, सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश तथा पारिवारिक पृष्ठभूमि जैसे कारक छात्राओं की संवेगात्मक परिपक्वता को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्ययन के निष्कर्ष शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यालय प्रशासकों तथा शिक्षा-नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी एवं मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं।)
Keywords
संवेगात्मक परिपक्वता, हिन्दी माध्यम, अंग्रेज़ी माध्यम, छात्राएँ, विद्यालयी वातावरण, किशोरावस्था।