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IJCRM
International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(1):790-795

सामान्य एवं मूक-बधिर विद्यार्थियों के पारिवारिक वातावरण और व्यक्तित्व विकास का अध्ययन: भारतीय संदर्भ में

Author Name: श्रीमती पुनिता तिवारी;   डॉ. ममता शर्मा;  

1. पीएच.डी. शोधार्थी, शिक्षा विभाग, आईईसी विश्वविद्यालय, बद्दी, सोलन, हिमाचल प्रदेश, भारत

2. सह प्राध्यापिका, शिक्षा विभाग, आईईसी विश्वविद्यालय, बद्दी, सोलन, हिमाचल प्रदेश

Abstract

वर्तमान शोध-पत्र का उद्देश्य भारतीय संदर्भ में सामान्य एवं मूक-बधिर विद्यार्थियों के पारिवारिक वातावरण और व्यक्तित्व विकास के मध्य संबंध का अध्ययन करना है। भारतीय समाज में परिवार बालक के सामाजिक, भावनात्मक, सांस्कृतिक, नैतिक और शैक्षिक विकास की प्रथम संस्था है। संयुक्त परिवार, एकल परिवार, ग्रामीण-शहरी परिवेश, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, माता-पिता की शिक्षा, पारिवारिक मूल्य, अनुशासन, धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताएँ और परिवार में संवाद की प्रकृति विद्यार्थी के व्यक्तित्व विकास को गहराई से प्रभावित करते हैं। सामान्य विद्यार्थियों की तुलना में मूक-बधिर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में परिवार की भूमिका और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि श्रवण-बाधा के कारण उन्हें भाषा, संचार, सामाजिक सहभागिता और आत्म-अभिव्यक्ति से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय संदर्भ में आर.पी.डब्ल्यू.डी. अधिनियम 2016, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, समावेशी शिक्षा तथा विशेष शिक्षा सेवाएँ मूक-बधिर विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण हैं। यह अध्ययन द्वितीयक स्रोतों, भारतीय शोधों, नीतिगत दस्तावेजों और उपलब्ध साहित्य के आधार पर तैयार किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सकारात्मक, सहयोगी, संवादपरक और स्वीकारात्मक पारिवारिक वातावरण सामान्य और मूक-बधिर दोनों प्रकार के विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक है; किंतु मूक-बधिर विद्यार्थियों के लिए परिवार की संचार-सुलभता, भावनात्मक स्वीकृति, शिक्षा में भागीदारी और पुनर्वास सहयोग विशेष रूप से आवश्यक हैं।

Keywords

पारिवारिक वातावरण, व्यक्तित्व विकास, मूक-बधिर विद्यार्थी, भारतीय संदर्भ, समावेशी शिक्षा, सामाजिक समायोजन, अभिभावकीय सहयोग।