IJ
IJCRM
International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(3):1171-1175

भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संवैधानिक संरक्षण एल्गोरिद्मिक शासन के युग में निजता, समानता और विधिसम्मत प्रक्रिया का परीक्षण

Author Name: कमलेन्द्र राव दिपान्कर;   डॉ. श्री मती विधि शम्भकर;  

1. चतुर्थ सेमेस्टर, ए. के. एस. विश्व विद्यालय, विधि संकाय, सतना, मध्य प्रदेश, भारत

2. ए. के. एस. विश्व विद्यालय, विधि संकाय, प्रमुख, सतना, मध्य प्रदेश, भारत

Abstract

21वीं सदी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) ने मानव जीवन, शासन व्यवस्था, न्यायपालिका, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा तथा आर्थिक गतिविधियों को अभूतपूर्व रूप से प्रभावित किया है। वर्तमान समय में सरकारें प्रशासनिक निर्णयों, सार्वजनिक सेवाओं के वितरण, निगरानी व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन तथा न्यायिक सहायता के लिए AI आधारित प्रणालियों का व्यापक उपयोग कर रही हैं। इस प्रक्रिया को Algorithmic Governance कहा जाता है, जिसमें निर्णय लेने की प्रक्रिया मानव के बजाय एल्गोरिद्म और डेटा विश्लेषण पर आधारित होती है।

भारत में भी डिजिटल इंडिया, स्मार्ट गवर्नेंस, डिजिटल पहचान प्रणाली (Aadhaar), फेस रिकॉग्निशन तकनीक, Predictive Policing] AI आधारित न्यायिक अनुसंधान तथा स्वचालित प्रशासनिक प्रणालियों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। यद्यपि AI प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता तथा निर्णय लेने की गति में वृद्धि करता है, किन्तु इसके साथ अनेक संवैधानिक एवं विधिक चुनौतियाँ भी उत्पन्न होती हैं। विशेष रूप से नागरिकों की निजता (Privacy), समानता (Equality), अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression), प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) तथा विधिसम्मत प्रक्रिया (Due Process of Law) जैसे संवैधानिक अधिकार AI आधारित शासन व्यवस्था के कारण प्रभावित हो सकते हैं। यदि एल्गोरिद्म पक्षपातपूर्ण Biased) हों या डेटा संग्रहण अनियंत्रित हो, तो नागरिकों के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन संभव है।

यह शोध पत्र भारत में AI  आधारित शासन व्यवस्था के संवैधानिक प्रभावों का अध्ययन करता है। शोध में भारतीय संविधान, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, न्यायिक निर्णयों तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि भारत में AI  के उपयोग को पूर्णतः प्रतिबंधित करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसे संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप विनियमित  करने की आवश्यकता है।

Keywords

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, एल्गोरिद्मिक शासन, निजता का अधिकार, समानता का अधिकार, संवैधानिक संरक्षण, डिजिटल शासन, डेटा संरक्षण, प्राकृतिक न्याय, एल्गोरिद्मिक पक्षपात, AI विनियमन।