International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(3):508-516
हिन्दमहासागर क्षेत्र में गैर-पारंपरिक समुद्री सुरक्षा खतरें और भारत की सामरिक भूमिका
Author Name: डॉ० अतुल चन्द; राहुल खत्री;
Abstract
हिन्दमहासागर ऐतिहासिक काल से ही आर्थिक और सामरिक दृष्टि से वैश्विक भू-राजनीति के केन्द्र में रहा है। आज विश्व का लगभग 90 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों पर निर्भर है, जिसका एक बड़ा हिस्सा हिन्दमहासागर से गुजरता है हिन्दमहासागर में मुक्त परिवहन के लिये सुरक्षित वातावरण का होना आवश्यक है। वैश्विक ऊर्जा व व्यापार की व्यस्तम् शिपिंग लेनों से घिरे हिन्दमहासागर क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियॉ समुद्री सुरक्षा व हितों के प्रति एक गंभीर चुनौती रही है। वैश्विक भूराजनीति में शक्ति संघर्ष के केन्द्र की भूमिका तथा पारम्परिक सुरक्षा खतरों से परे इस क्षेत्र में गैर पारम्परिक समुद्री सुरक्षा खतरे इसके क्षेत्रीय राष्ट्रों के साथ ही बाहरी राष्ट्रों के समुद्री हितों व सुरक्षा को प्रभावित कर रहे है। हिन्दमहासागर क्षेत्र में गैर पारम्परिक समुद्री सुरक्षा सम्बन्धी खतरों में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है, दूसरी ओर राष्ट्रों की समुद्र पर बढती निर्भरता ने समुद्री परिवहन को व्यापार का महत्वपूर्ण साधन बनाया है। इस क्षेत्र में गैर-पारम्परिक सुरक्षा खतरों के रूप में आतंकवाद, समुद्री डकैती, मादक पदार्थो व हथियार की तस्करी, जलवायु परिवर्तन आदि चुनौतियॉ ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक हितों, क्षेत्रीय स्थिरता व मानवीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करते हैं।
Keywords
रणनीतिक चोक प्वॉइट, लाल सागर, अदन की खाड़ी, सीएमएफ-150, हौथी विद्रोही, IFC-IOR आदि।