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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(2):807-810

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का सर्वधर्म समभाव : एक सुक्ष्म अवलोकन

Author Name: डॉ. विनय कुमार पटेल;  

1. असिस्टेंट प्रोफेसर, राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बांदा, उत्तर प्रदेश, भारत

Abstract

भारत एक बहुधार्मिक, बहुसांस्कृतिक और विविधताओं से भरा देश है। यहाँ विभिन्न धर्मों का सह-अस्तित्व सदियों से रहा है। ऐसे में सर्वधर्म समभाव की अवधारणा भारतीय समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस विचार के प्रमुख प्रणेता और व्यावहारिक समर्थक महात्मा गांधी थे, जिन्होंने अपने जीवन एवं दर्शन के माध्यम से धर्मों के प्रति समान आदर और सहिष्णुता का आदर्श प्रस्तुत किया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान नेता, विचारक और समाज सुधारक थे। उन्होंने जीवन में सत्य, अहिंसा और मानवता के आदर्शों को अपनाया। गाँधीजी के विचारों में सर्वधर्म समभाव  का सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जिसका अर्थ है—सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और समान दृष्टि रखना । गाँधीजी का मानना था कि सभी धर्म मानव को सत्य, प्रेम और नैतिकता का मार्ग दिखाते हैं, इसलिए किसी भी धर्म के प्रति घृणा या भेदभाव नहीं होना चाहिए। गांधी जी के सभी विचार समय-समय पर उनके सामने आने वाली परिस्थितियों और विभिन्न समस्याओं के समाधान खोज निकालने के फलस्वरूप विकसित हुए है।

Keywords

सत्याग्रह, महात्मा गाँधी, सत्य, अहिंसा, सर्वधर्म समभाव, धार्मिक, समन्वय, मानवता, सहिष्णुता, संप्रदायवाद, वर्तमान, प्रासंगिकता।