International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(1):891-894
भारतीय संविधान में महिलाओं के अधिकारों की स्थापना में डॉ. बी. आर. अंबेडकर की भूमिका: एक अध्ययन
Author Name: डॉ. स्वदेश कुमार;
Abstract
भारतीय समाज में महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति ऐतिहासिक रूप से पितृसत्तात्मक संरचनाओं, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक मान्यताओं से प्रभावित रही है। लंबे समय तक महिलाओं को शिक्षा, संपत्ति, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी के क्षेत्रों में सीमित अवसर प्राप्त हुए, जिससे उनकी सामाजिक स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बनी रही। आधुनिक भारत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण की दिशा में डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों को अपने सामाजिक और राजनीतिक दर्शन का आधार बनाया और महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए संवैधानिक उपायों को अत्यंत आवश्यक माना।
भारतीय संविधान के निर्माण में डॉ. अंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि संविधान में सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हों, चाहे वे किसी भी जाति, धर्म या लिंग से संबंधित हों। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के माध्यम से महिलाओं को समानता और समान अवसर का अधिकार प्रदान किया गया तथा लैंगिक भेदभाव को असंवैधानिक घोषित किया गया। इसके अतिरिक्त राज्य के नीति निदेशक तत्वों में महिलाओं के लिए समान वेतन, मातृत्व सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे प्रावधान शामिल किए गए। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य भारतीय संविधान में महिलाओं के अधिकारों की स्थापना में डॉ. बी. आर. अंबेडकर की भूमिका का विश्लेषण करना है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि अंबेडकर की संवैधानिक दृष्टि ने भारत में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव रखी।
Keywords
अंबेडकर, भारतीय संविधान, महिला अधिकार, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता