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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2023;2(1):86-88

वैश्वीकरण, श्रम बाजार और अल्पसंख्यक महिलाओं की नई पहचान

Author Name: डॉ० शारदा कुमारी;  

1. सहायक प्राध्यापक, वाई. बी.एन. यूनिवर्सिटी, रांची, झारखण्ड, झारखंड भारत

Paper Type: research paper
Article Information
Paper Received on: 2023-01-05
Paper Accepted on: 2023-01-27
Paper Published on: 2023-01-30
Abstract:

वैश्वीकरण आधुनिक विश्व की सबसे प्रभावशाली सामाजिक-आर्थिक प्रक्रिया है, जिसने मानव जीवन के लगभग सभी पक्षों को प्रभावित किया है। यह केवल आर्थिक उदारीकरण या बाजार विस्तार की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सामाजिक संरचनाओं, सांस्कृतिक मूल्यों, राजनीतिक व्यवस्थाओं और व्यक्तिगत पहचानों को पुनर्गठित करने वाली एक व्यापक ऐतिहासिक प्रक्रिया है। वैश्वीकरण के कारण पूंजी, तकनीक, सूचना और श्रम का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीव्र प्रवाह हुआ है, जिसने राष्ट्रीय सीमाओं के महत्व को आंशिक रूप से कम किया है। इसके परिणामस्वरूप श्रम बाजार का स्वरूप बदला है और रोजगार की प्रकृति में गहरे परिवर्तन आए हैं।

इन परिवर्तनों का प्रभाव समाज के सभी वर्गों पर पड़ा है, किंतु यह प्रभाव समान नहीं रहा। विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं पर वैश्वीकरण का प्रभाव बहुस्तरीय, जटिल और द्वंद्वात्मक रहा है। ये महिलाएँ पहले से ही लैंगिक असमानता, सामाजिक भेदभाव और आर्थिक वंचना का सामना करती रही हैं। वैश्वीकरण और उससे उत्पन्न नए श्रम बाजार ने एक ओर उन्हें नए अवसर प्रदान किए हैं, वहीं दूसरी ओर असुरक्षा, शोषण और असमानता की नई चुनौतियाँ भी उत्पन्न की हैं। इस लेख में वैश्वीकरण, श्रम बाजार और अल्पसंख्यक महिलाओं की नई पहचान के बीच संबंधों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण किया गया है।

Keywords:

वैश्वीकरण, श्रम बाजार, अल्पसंख्यक महिलाएँ, नई पहचान, आर्थिक सशक्तिकरण, असंगठित क्षेत्र, सेवा क्षेत्र, रोजगार अवसर, लैंगिक समानता, सामाजिक परिवर्तन, असमानता, असुरक्षित रोजगार, शोषण, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण, सांस्कृतिक बाधाएँ, आत्मनिर्भरता, नीतिगत हस्तक्षेप ।

How to Cite this Article:

डॉ० शारदा कुमारी. वैश्वीकरण, श्रम बाजार और अल्पसंख्यक महिलाओं की नई पहचान. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2023: 2(1):86-88


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