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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(5):265-269

स्वामी विवेकानन्द के वेदांत दर्शन का अध्ययन

Author Name: कंचन यादव;   प्रोफ़ेसर डॉ. संजय कुमार यादव;  

1. शोधार्थिनी, डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्ववि‌द्यालय, आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत

2. शिक्षक, शिक्षा विभाग, आदर्श कृष्ण महाविद्यालय शिकोहाबाद, फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत

Paper Type: research paper
Article Information
Paper Received on: 2026-08-04
Paper Accepted on: 2026-09-13
Paper Published on: 2026-09-17
Abstract:

स्वामी विवेकानन्द (1863-1902) ने वेदांत दर्शन को आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप व्याख्यायित करते हुए उसे नये जीवन-मूल्यों से जोड़ा। उन्होंने अद्वैत वेदांत को केवल दार्शनिक सिद्धांत न मानकर व्यावहारिक जीवन-दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार प्रत्येक जीवात्मा स्वयं में अनंत, पूर्ण और दिव्य है, परंतु अज्ञानवश वह अपनी शक्ति को पहचान नहीं पाता। आत्मा की इसी दिव्यता के अनुभव को ही उन्होंने वेदांत का सार कहा। स्वामी विवेकानन्द ने वेदांत के सार्वभौमिक और वैज्ञानिक पक्ष को विशेष महत्व दिया। उनका मानना था कि धर्म का उद्देश्य मनुष्य की आत्मिक उन्नति है, न कि संप्रदायों और आडंबरों में बँधना। उन्होंने वेदांत को ‘समानता, श्स्वतंत्रता’ और ‘मानव-सेवा’ की भावना से जोड़ा तथा कहा कि ‘जीव-सेवा ही शिव-सेवा है।’ उनके वेदांत दर्शन का मूल आधार था -अ‌द्वैतवाद, जिसमें समस्त सृष्टि को एक ही ब्रह्म स्वरूप माना गया है। इस दृष्टि से न कोई उच्च है न कोई नीच, सबमें वही परमसत्ता विद्यमान है। यही विचार सामाजिक समरसता, जाति-पाति के उन्मूलन तथा मानवता की सेवा के लिए प्रेरक बना। संक्षेप में, विवेकानन्द का वेदांत दर्शन न केवल आत्मज्ञान और मुक्ति की ओर ले जाने वाला मार्ग है, बल्कि यह समाज में कार्य, सेवा, समानता और आत्मबल जागरण का व्यावहारिक सूत्र भी है। इस प्रकार उनका वेदांत आधुनिक युग में अध्यात्म और प्रगति का समन्वय स्थापित करता है।

Keywords:

स्वामी विवेकानन्द, वेदांत, दर्शन

How to Cite this Article:

कंचन यादव,प्रोफ़ेसर डॉ. संजय कुमार यादव. स्वामी विवेकानन्द के वेदांत दर्शन का अध्ययन. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2026: 5(5):265-269


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