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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(2):1119-1121

डॉ. रामकुमार वर्मा का हिन्दी प्रेम एवं सामाजिकता

Author Name: डॉ. कर्मेन्द्र सिंह सेंगर;  

1. प्रवक्ता, हिन्दी, श्री मलखानसिंह महाविद्यालय ठूलई, हाथरस, उत्तर प्रदेश, भारत

Paper Type: research paper
Article Information
Paper Received on: 2026-03-11
Paper Accepted on: 2026-04-25
Paper Published on: 2026-04-30
Abstract:

राम कुमार वर्मा हिंदी साहित्य के बहुआयामी रचनाकार थे, जिन्होंने कविता, नाटक, एकांकी तथा आलोचना के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य को समृद्ध किया। उनके साहित्य में हिंदी भाषा के प्रति गहरा अनुराग, भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था तथा सामाजिक जीवन के प्रति सजग दृष्टि स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनका हिंदी-प्रेम केवल भाषा के प्रयोग तक सीमित नहीं था, बल्कि हिंदी के विकास, प्रचार-प्रसार और साहित्यिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ था। उनकी रचनाओं में सामाजिक विषमता, मानवीय संबंधों, नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संवेदनाओं तथा व्यक्ति और समाज के पारस्परिक संबंधों का प्रभावपूर्ण चित्रण मिलता है। वे साहित्य को समाज के प्रति उत्तरदायी मानते थे और उनकी रचनात्मक चेतना में मानवीय करुणा, सहानुभूति, सामाजिक समरसता तथा लोकमंगल की भावना प्रमुख है। प्रस्तुत अध्ययन में राम कुमार वर्मा के हिंदी-प्रेम के विविध आयामों तथा उनकी सामाजिक चेतना का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि उनकी साहित्यिक दृष्टि भाषा, संस्कृति और समाज को एक-दूसरे से जोड़कर देखती है।

Keywords:

राम कुमार वर्मा, हिंदी-प्रेम, हिंदी भाषा, हिंदी साहित्य, सामाजिकता, सामाजिक चेतना, भारतीय संस्कृति, मानवीय संवेदना, सामाजिक समरसता, लोकमंगल, नैतिक मूल्य, सामाजिक उत्तरदायित्व, भाषा-संवर्धन, राष्ट्रभाषा, साहित्य और समाज।

How to Cite this Article:

डॉ. कर्मेन्द्र सिंह सेंगर. डॉ. रामकुमार वर्मा का हिन्दी प्रेम एवं सामाजिकता. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2026: 5(2):1119-1121


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