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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2024;3(5):293-296

रामचरितमानस में समन्वय की भावना

Author Name: डॉ. पुनीत श्रीवास्तव;  

1. सहायक आचार्य, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी, उत्तर प्रदेश, भारत

Paper Type: review paper
Article Information
Paper Received on: 2024-08-05
Paper Accepted on: 2024-10-27
Paper Published on: 2024-10-30
Abstract:

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस  भारतीय सांस्कृतिक चेतना का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह न केवल भक्ति-आधारित काव्य है, बल्कि भारतीय समाज, धर्म, परंपरा, नीति, मर्यादा और मानव-मूल्यों का समन्वित रूप भी है। इस शोध-पत्र का उद्देश्य यह प्रतिपादित करना है कि रामचरितमानस  किस प्रकार भारतीय संस्कृति को एक सूत्र में पिरोता है और धर्म, दर्शन, राजनीति, समाज तथा मानव-मूल्यों का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। तुलसीदास की काव्य-दृष्टि एकता, सामंजस्य और सर्वधर्म समभाव को स्थापित करती है, जो आज भी अत्यंत प्रासंगिक है।

Keywords:

रामचरितमानस, समन्वय की भावना, भक्ति दर्शन, भारतीय संस्कृति, सगुण-निर्गुण समन्वय, सामाजिक समरसता, शैव-वैष्णव एकता।

How to Cite this Article:

डॉ. पुनीत श्रीवास्तव. रामचरितमानस में समन्वय की भावना. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2024: 3(5):293-296


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