International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2025;4(1):216-222
राजस्थान में ग्रामीण–नगरीय जनसांख्यिकीय द्विभाजन का विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author Name: भगवान सिंह; डॉ. आलोक श्रीवास्तव;
Paper Type: research paper
Article Information
Abstract:
जनसांख्यिकी में मानव आबादी का सांख्यिकीय अध्ययन किया जाता है। ग्रामीण–नगरीय जनसांख्यिकीय द्विभाजन में जनसंख्या के वितरण, घनत्व, साक्षरता, लिंगानुपात, आर्थिक गतिविधियाँ एवं व्यावसायिक संरचना, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का वितरण, बाल जनसंख्या, प्रवास, जनसंख्या में दशकीय परिवर्तन आदि तत्त्वों का विश्लेषण ग्रामीण एवं नगरीय संदर्भ में किया जाता है। प्रस्तुत शोध कार्य में राजस्थान की ग्रामीण–नगरीय जनसांख्यिकीय द्विभाजन का विश्लेषणात्मक अध्ययन 2011 की जनगणना को आधार मानकर किया गया है। शोध कार्य में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध विधियों का प्रयोग किया गया है। शोध कार्य का उद्देश्य राजस्थान के ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय द्विभाजन के विभिन्न तत्त्वों का विश्लेषण करना है। राजस्थान की कुल जनसंख्या जनगणना 2011 के अनुसार 6,85,48,437 है, जिसमें से ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या का अनुपात क्रमशः 75.1% एवं 24.9% है, जो यह स्पष्ट करता है कि राज्य में जनसंख्या का ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक संकेन्द्रण है। राज्य का जनसंख्या घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, परंतु ग्रामीण क्षेत्र कम सघन बसे हुए हैं, जबकि नगरीय क्षेत्र अधिक सघन बसे हुए हैं। राज्य में ग्रामीण–नगरीय साक्षरता दर में पर्याप्त अंतर है, जहाँ नगरीय साक्षरता दर 79.7% है, वहीं ग्रामीण साक्षरता दर मात्र 61.4% है। राज्य में ग्रामीण लिंगानुपात (933), नगरीय लिंगानुपात (914) की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक है। विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि राजस्थान के ग्रामीण–नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या वितरण, घनत्व, साक्षरता, लिंगानुपात, आर्थिक गतिविधियाँ, व्यावसायिक संरचना, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का वितरण, बाल जनसंख्या, प्रवास तथा दशकीय परिवर्तन जैसे जनसांख्यिकीय तत्त्वों में स्पष्ट एवं गहन अंतर विद्यमान है।
Keywords:
ग्रामीण–नगरीय द्विभाजन, जनसांख्यिकी, जनसंख्या, लिंगानुपात, साक्षरता, प्रवास।
How to Cite this Article:
भगवान सिंह,डॉ. आलोक श्रीवास्तव. राजस्थान में ग्रामीण–नगरीय जनसांख्यिकीय द्विभाजन का विश्लेषणात्मक अध्ययन. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2025: 4(1):216-222
Download PDF