International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(1):719-723
परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का किशोरों के शैक्षिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत समायोजन पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन
Author Name: पूजा राणा; डॉ. कुलदीप कुमार;
Abstract
परिवार मनुष्य की प्रथम पाठशाला है और परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति (Socio-Economic Status) उस पाठशाला की नींव है। प्रस्तुत शोध पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विशेष सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के प्रभाव का गहन अध्ययन है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जहाँ एक ओर हरित क्रांति के बाद जाट, गुर्जर, त्यागी समुदायों में आर्थिक संपन्नता आई, वहीं दूसरी ओर भूमिहीन मजदूर, ईंट भट्ठा श्रमिक और छोटे काश्तकार आज भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। एक ही कक्षा में बैठे दो किशोरों के बस्ते का वजन एक जैसा है, पर उनके भविष्य के सपने, उनके संघर्ष और उनके समायोजन की चुनौतियाँ बिल्कुल अलग हैं।इस शोध का मुख्य उद्देश्य उच्च, मध्यम और निम्न सामाजिक-आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के किशोरों के शैक्षिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत समायोजन में अंतर का वैज्ञानिक अध्ययन करना है। शोध में वर्णनात्मक सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया। मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली जनपदों के 15 मान्यता प्राप्त इंटर कॉलेजों से 450 किशोरों (प्रत्येक SES वर्ग से 150) का स्तरीकृत यादृच्छिक न्यादर्श लिया गया। उपकरण के रूप में डॉ. राजीव भारद्वाज द्वारा संशोधित कुप्पुस्वामी सामाजिक-आर्थिक स्थिति मापनी (2022) और डॉ. ए.के.पी. सिन्हा एवं आर.पी. सिंह समायोजन सूची (60 पद) का उपयोग किया गया।परिणामों से स्पष्ट हुआ कि शैक्षिक समायोजन में उच्च SES वर्ग सार्थक रूप से श्रेष्ठ है (F=24.56, p<0.01), जबकि पारिवारिक समायोजन में मध्यम SES वर्ग सबसे अधिक समायोजित पाया गया। व्यक्तिगत समायोजन में मध्यम SES वर्ग में सबसे अधिक अस्थिरता और चिंता पाई गई। यह शोध NEP 2020 के समता (Equity) के सिद्धांत के आलोक में विद्यालयी हस्तक्षेप और सामाजिक नीति के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ प्रस्तुत करता है।
Keywords
सामाजिक-आर्थिक स्थिति, किशोर, शैक्षिक समायोजन, पारिवारिक समायोजन, व्यक्तिगत समायोजन, किशोरावस्था, परिवार।