IJ
IJCRM
International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2024;3(6):322-325

स्वतंत्रता संग्राम में हिन्दी कवियों का योगदान

Author Name: डॉ. सुजाता मगदुम;  

1. प्राचार्या तथा हिन्दी सह-प्राध्यापिका, सरकारी पदवी महाविद्यालय, सदलगा, कर्नाटक, भारत

Abstract

प्रस्तुत आलेख भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हिन्दी कवियों के योगदान का विवेचन करता है। लेखिका के अनुसार स्वाधीनता-प्राप्ति का श्रेय केवल स्वतंत्रता सेनानियों को ही नहीं, अपितु उस युग के कवियों को भी दिया जाना चाहिए, जिन्होंने अपनी ओजस्वी रचनाओं के माध्यम से जनमानस में क्रांति, राष्ट्रप्रेम और बलिदान की भावना जगाई। आलेख में भारतेंदु हरिश्चंद्र से लेकर द्विवेदी युग तथा छायावाद युग तक के कवियों—मैथिलीशरण गुप्त, माखनलाल चतुर्वेदी, सुभद्रा कुमारी चौहान, श्याम नारायण पांडेय, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, निराला, बालकृष्ण शर्मा 'नवीन', रामधारी सिंह दिनकर तथा बंकिमचंद्र चटर्जी आदि की प्रतिनिधि रचनाओं के उद्धरण सहित यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार इन कवियों ने अंग्रेजी शासन की शोषणकारी नीतियों का विरोध कर जनता को आंदोलन हेतु प्रेरित किया। साथ ही मुंशी प्रेमचंद के गद्य-योगदान तथा कन्नड़, मराठी, तमिल, बंगला आदि भारतीय भाषाओं के कवियों-साहित्यकारों की समानांतर भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। निष्कर्षतः आलेख यह प्रतिपादित करता है कि इन कवियों की निर्भीक लेखनी ने न केवल स्वाधीनता संग्राम को नई ऊर्जा दी, बल्कि भारतीय भाषाओं के साहित्य को भी समृद्ध कर राष्ट्रप्रेम की एक स्थायी परंपरा स्थापित की, जिसे जीवित रखना वर्तमान साहित्यकारों का दायित्व है।

Keywords

स्वतंत्रता संग्राम, संघर्ष, बलिदान, योगदान, क्रांतिकारी, आंदोलन, आधुनिक युग, परतंत्रता, इतिहास, समाज, कविता, साहित्यकार, भूमिका, राष्ट्रप्रेम |