International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(1):693-697
माध्यमिक स्तर के विद्यालयों में अध्ययनरत् विद्यार्थियों के आत्म सम्प्रत्यय का अध्ययन
Author Name: कृपाल सिंह; प्रोफेसर कमलेश कुमार चौधरी;
Abstract
आत्म सम्प्रत्यय व्यक्ति की एक धारणा है जो वह अपने बारे में रखता है। इसके द्वारा व्यक्ति स्वयं को योग्य अथवा अयोग्य मान लेता है जिसका प्रभाव उसके सारे क्रियाकलापों पर पड़ता है। उच्च स्तर के आत्म सम्प्रत्यय वाले व्यक्ति का सकारात्मक दृष्टिकोण होता है। ऐसे व्यक्तियों में आत्म विश्वास उच्च स्तर का पाया जाता है। इसके विपरीत निम्न स्तर के आत्म सम्प्रत्यय वाले व्यक्ति में नकारात्मक ऊर्जा पायी जाती है। वह कुंठा एवं हताशा का शिकार होता हो जाता है जो व्यक्तिगत हानि तथा सामाजिक हानि को संदर्भित करता है। विद्यार्थियों के सकारात्मक आत्म सम्प्रत्यय के विकास में विद्यालयों का सर्वाधिक योगदान रहता है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के आत्म सम्प्रत्यय का लिंग भेद तथा निवास क्षेत्र के आधार पर अध्ययन करना था। अध्ययन को बरेली जनपद की आँवला तहसील में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 10 में अध्ययनरत विद्यार्थियों तक सीमित रखा गया। शोध में सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया तथा स्तरीकृत यादृच्छिक प्रतिचयन के माध्यम से कुल 129 विद्यार्थियों का चयन किया गया। विद्यार्थियों के आत्म सम्प्रत्यय के मापन हेतु डॉ. आर. के. सारस्वत द्वारा निर्मित आत्म-सम्प्रत्यय प्रश्नावली का प्रयोग किया गया तथा प्राप्त प्रदत्तों के विश्लेषण हेतु मध्यमान, मानक विचलन एवं टी-परीक्षण का उपयोग किया गया। निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि छात्र एवं छात्राओं के आत्म सम्प्रत्यय में कोई सार्थक अंतर नहीं पाया गया तथा संबंधित शून्य परिकल्पना स्वीकार की गई। इसी प्रकार शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के आत्म सम्प्रत्यय में भी कोई सार्थक अंतर नहीं पाया गया और दूसरी शून्य परिकल्पना भी स्वीकार की गई। अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि विद्यार्थियों के सकारात्मक आत्म सम्प्रत्यय के विकास के लिए समान शैक्षिक अवसर, सहयोगात्मक विद्यालयी वातावरण, प्रोत्साहन, मार्गदर्शन तथा परामर्श की व्यवस्था आवश्यक है।
Keywords
माध्यमिक स्तर,विद्यार्थी, आत्म सम्प्रत्यय,लिंग भेद, क्षेत्र।