International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(3):1107-1110
वाल्मीकि रामायण में मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता
Author Name: शक्ति कुमार पासवान;
Abstract
महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित 'वाल्मीकि रामायण' भारतीय साहित्य का आदिकाव्य होने के साथ-साथ विश्व साहित्य की अमूल्य एवं कालजयी धरोहर है। लगभग 24,000 श्लोकों तथा सात काण्डों में निबद्ध यह महाकाव्य केवल भगवान श्रीराम के जीवन का आख्यान नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, नैतिक आदर्शों, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा आदर्श जीवन-दर्शन का व्यापक ग्रंथ है। इसमें सत्य, धर्म, कर्तव्यनिष्ठा, करुणा, त्याग, मर्यादा, सहिष्णुता, पारिवारिक समरसता, नेतृत्व, न्याय तथा लोककल्याण जैसे सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों का अत्यंत प्रभावशाली निरूपण मिलता है।
वर्तमान समय में जब समाज नैतिक पतन, व्यक्तिगत स्वार्थ, पारिवारिक विघटन, मानसिक तनाव, सामाजिक असमानता, पर्यावरणीय असंतुलन तथा वैश्विक अशांति जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब वाल्मीकि रामायण के आदर्श और भी अधिक प्रासंगिक प्रतीत होते हैं। इस महाकाव्य में वर्णित जीवन-मूल्य व्यक्ति को आत्मसंयम, कर्तव्यपरायणता, सह-अस्तित्व, सामाजिक सद्भाव तथा उत्तरदायी नागरिकता की प्रेरणा प्रदान करते हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में समकालीन सामाजिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में वाल्मीकि रामायण में निहित मानवीय मूल्यों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है तथा यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि ये मूल्य आधुनिक समाज में नैतिक पुनर्जागरण, सामाजिक समरसता, शांति एवं सतत् मानवीय विकास के लिए आज भी समान रूप से प्रासंगिक और मार्गदर्शक हैं।
Keywords
वाल्मीकि रामायण, साहित्य, करूणा, पारिवारिक, सामाजिक।