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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(4):328-334

1947 के विभाजन का हरियाणा के सामाजिक एवं आर्थिक जीवन पर प्रभाव : एक ऐतिहासिक अध्ययन

Author Name: हेमंत वर्मा;  

1. इतिहास विभाग, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी, हरियाणा, भारत

Abstract

सन् 1947 का भारत-विभाजन भारतीय इतिहास की ऐसी घटना है जिसने केवल दो स्वतंत्र राष्ट्रों के निर्माण का मार्ग ही प्रशस्त नहीं किया, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। इस घटना के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर जनसंख्या का स्थानांतरण हुआ, जिसके साथ सामाजिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सांस्कृतिक परिवर्तन भी जुड़े रहे। वर्तमान हरियाणा उस समय अविभाजित पंजाब का हिस्सा था और विभाजन से प्रभावित प्रमुख क्षेत्रों में सम्मिलित था। विभाजन के बाद हरियाणा में केवल जनसंख्या का स्वरूप ही नहीं बदला, बल्कि भूमि स्वामित्व, उत्पादन प्रणाली, स्थानीय बाजारों और सामुदायिक संबंधों में भी उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले। अनेक स्थानों पर परित्यक्त संपत्तियों का पुनर्वितरण हुआ, नई व्यापारिक इकाइयाँ स्थापित हुईं और कृषि क्षेत्र में ऐसे परिवर्तन प्रारम्भ हुए जिन्होंने आगे चलकर राज्य के आर्थिक विकास को गति प्रदान की। दूसरी ओर स्थानीय समाज और विस्थापित समुदायों के बीच समायोजन की प्रक्रिया ने सामाजिक पुनर्गठन का नया अध्याय भी लिखा।

प्रस्तुत शोध का उद्देश्य विभाजन के पश्चात हरियाणा में हुए सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तनों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण करना है। अध्ययन के लिए सरकारी अभिलेख, जनगणना प्रतिवेदन, जिला गजेटियर, पुनर्वास विभाग के दस्तावेज तथा संबंधित ऐतिहासिक साहित्य का उपयोग किया जाएगा। यह शोध इस तथ्य को समझने का प्रयास करता है कि विभाजन को केवल विस्थापन और त्रासदी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है; इसके परिणामस्वरूप हरियाणा में सामाजिक पुनर्गठन, आर्थिक पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय विकास की नई प्रक्रियाएँ भी विकसित हुईं।

Keywords

भारत-विभाजन, हरियाणा, शरणार्थी, पुनर्वास, सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक विकास, कृषि, नगरीकरण, भूमि पुनर्वितरण, ऐतिहासिक अध्ययन