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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(4):141-144

मैला ढोना और मानवाधिकारः अतंर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से भारत का मूल्यांकन

Author Name: सारिका सिंह;   डॉ. ईष्वर स्वरूप सहाय;  

1. Research Scholar, Department of Sociology, Dayalbagh Educational Institute, Agra (Deemed University), Dayalbagh Educational Institute

2. Supervisor, Dayalbagh Educational Institute, Agra (Deemed University), Dayalbagh Educational Institute

Abstract

मैला ढोना, जिसे मैनुअल स्कैवेंजिगं के रूप में जाना जाता है, भारत में एक ऐसी प्रथा है जो मानव गरिमा, समानता, स्वास्थ्य, और आर्थिक अधिकारों का गंभीर उल्लघंन करती है। यह प्रथा, जो मुख्य रूप से दलित समदुायों, विषेषकर महिलाओं से जुड़ी है, भारतीय सविंधान के अनुच्छेद 17 और 21, साथ ही यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफह्यमून राइट्स (UDHR), अतंरराष्ट्रीय श्रम सगंठन (ILO) के कन्वेंशन, और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) जैसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन करती है। यह शोध पत्र भारत में मैला ढोने की स्थिति का विश्लेषण करता है, इसके मानवाधिकार उल्लंघनों की गहन जाँच करता है, और अतंरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से तुलनात्मक मल्ूयांकन प्रस्तुत करता है। पत्र नीतिगत सुधार, तकनीकी नवाचार, सामाजिक जागरूकता, और पुनर्वास के माध्यम से इस प्रथा को समाप्त करने के लिए व्यावहारिक सुझाव देता है।

Keywords

मैला ढोना, मानवाधिकार, भेदभाव, स्वच्छ भारत, सतत विकास, पुर्नावास।