International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2024;3(5):293-296
रामचरितमानस में समन्वय की भावना
Author Name: डॉ. पुनीत श्रीवास्तव;
Abstract
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस भारतीय सांस्कृतिक चेतना का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह न केवल भक्ति-आधारित काव्य है, बल्कि भारतीय समाज, धर्म, परंपरा, नीति, मर्यादा और मानव-मूल्यों का समन्वित रूप भी है। इस शोध-पत्र का उद्देश्य यह प्रतिपादित करना है कि रामचरितमानस किस प्रकार भारतीय संस्कृति को एक सूत्र में पिरोता है और धर्म, दर्शन, राजनीति, समाज तथा मानव-मूल्यों का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। तुलसीदास की काव्य-दृष्टि एकता, सामंजस्य और सर्वधर्म समभाव को स्थापित करती है, जो आज भी अत्यंत प्रासंगिक है।
Keywords
रामचरितमानस, समन्वय की भावना, भक्ति दर्शन, भारतीय संस्कृति, सगुण-निर्गुण समन्वय, सामाजिक समरसता, शैव-वैष्णव एकता।