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International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(5):312-315

पचपन खंभे लाल दीवारें उपन्यास में स्त्री संवेदना

Author Name: अविनाश उपाध्याय;   प्रोफ़ेसर दीपक प्रकाश त्यागी;  

1. शोधार्थी, हिन्दी विभाग, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत

2. शोध निर्देशक, हिंदी विभाग, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत

Abstract

उषा प्रियंवदा के 'पचपन खंभे लाल दीवारें' उपन्यास में स्त्री जीवन के सामाजिक-आर्थिक विवशताओं की प्रमाणिक अभिव्यक्ति हुई है। इस उपन्यास में आधुनिक स्त्री जीवन की ऊब, छटपटाहट,संत्रास और अकेलेपन को केवल अभिव्यक्त नहीं किया गया बल्कि संवेदना के स्तर पर समझने का सफल प्रयास किया गया है। 'पचपन खंभे लाल दीवारें' उषा प्रियंवदा का पहला उपन्यास होते हुए भी हिन्दी साहित्य में स्त्री केन्द्रित आधुनिक चेतना का महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जहाँ हमें स्त्री प्रेम का मनोवैज्ञानिक संरचना एवं सामाजिक बंधनों ,स्त्री अस्मिता, मानसिक द्वंद्व और आत्म-निर्णय की जटिल प्रक्रिया का यथार्थ चित्र दिखाई पड़ता है। प्रस्तुत शोध पत्र में उपन्यास के चिह्नित प्रेम की बहुआयामी संरचना का विश्लेषण किया गया है, जहाँ स्त्री पुरुष संबंध, सामाजिक मर्यादाएं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को केन्द्र में रखा गया है।

Keywords

स्त्री-चेतना, आधुनिक, अकुलाहट, संत्रास, मानसिक, समाजिक, अकेलापन,नैतिकता, संवेदना , मनोवैज्ञानिक,आत्मनिर्भर, तात्कालिकता, अंतर्मुखी।